मिड डे मील से लेकर छात्रवृत्ति तक और बाकी सभी बच्चों से जुडी सरकारी योजनाओं में बीच में ही सब गल्प कर जाने वाले बाबुओं, प्रधानों, ठेकेदारों, अध्यापकों इत्यादि किसी को भी क्या इनकी मासूमियत पर ज़रा भी दया नहीं आती?
क्या कभी वो वक्त भी आएगा जब इस देश के हर बच्चे को इन टुक्कीयों और छेदों से आजादी मिलेगी?



















